मेष राशि का स्वामी ग्रह,दिशा ( कार्य करने की ) राशि का तत्व, मेष राशि का स्वभाव, मेष राशि के नक्षत्र
इस राशि के जातक पतले द्ढ शरीरवाले,स्थूल जांघोंवाले ,तीव्रगाती से चलने वाले ,कोमल स्वभाव ,भयंकर कर्म करने वाले, पानी से डरने वाले ,स्त्रियों के चित्त को प्रसन्नतादायक , पराक्रमी ,राज्यमान धन तथा धर्म कमाने मे परोपकारी ,सुशील ,मानी,चंचक ,कार्य –उतावला यात्राप्रिय ,दानी परदेशवासी तथा कठोर चित्त के होते है इस राशि वाले जातक को माँ का अल्प सुख तथा दो विवाह होने की संभावना रहती है |युध्द तथा स्वतंत्र व्यवसाय से उन्नति होती है |
मेष राशि से संबन्धित तथ्य
मेष राशि का स्वामी ग्रह
मेष राशि का स्वामीग्रह “मंगल”ग्रह होता है
दिशा (कार्य करने की)
पूर्व दिशा है
प्रत्येक राशि किसी ना किसी तत्व से सबंधित होती है
मेष राशि : अग्नि तत्व की राशि है
स्वभाव :-
मेष राशि का स्वभाव चर है चर राशियाँ स्वभाव से चलायमान होती है लग्न राशि मे जो भी राशियाँ होती वह अपने से जातक को प्रभावित करती है |
नक्षत्र :-
अशिवनी के चार भरणी के चार कृतिका का पहला चरण लेकर “मेष” राशि का निर्माण होता है
प्रथम द्वितीय तृतीय चतुर्थ
अशिवनी के चार चरण :- च चे चो ला
भरणी के चार चरण :- ली लो ले लो
कृतिका का प्रथम चरण :- आ
नक्षत्रो का जातक पर प्रभाव :-
1॰अशिवनी नक्षत्र : नक्षत्र स्वामी “केतु” , जातक पर प्रभाव : बुद्धिमान, धनी, वस्त्र, आभूषण प्रिय
2 भरणी : शुक्र प्रभावकूर ,विकल, कार्यकुशल ,लोभी
3 कृतिका :सूर्य, प्रभाव :- तेजस्वी, क्रोधी भ्रमणशील स्वाभिमानी
अतः मेष राशि मे जन्मे जातक पर तीन ग्रहो और तीनों नक्षत्रो का जातक की कुण्डली के अनुसार ,महादशा ,अंर्तदशा , प्रव्यंतरदश, योगिनीदशा का प्रभाव पड़ता है अच्छे घरो मे ग्रहो केतु + शुक्र = positive युति होने पर साकारात्मक तथा प्रभाव पड़ता है
अशिवनी नक्षत्र का प्रभाव :-
विचार शील , अध्ययन – अध्यापन करने वाला ज्योतिष ,वैधक आदि शास्त्रो मे रुचि रखने वाला ,लेखक ,ईमानदार, चंचल, प्रकृति ,मस्से का रोगी और ग्रह-क्लहकर्ता
भरणी नक्षत्र का प्रभाव :-
बलवान, शत्रुओ पर अचानक हमला करने वाला चालाक,धार्मिक कार्यो मे रुचि रखने वाला ,चित्रकार,धोखेबाज, निम्न स्तरीय कार्य करने वाला तथा उन्नति की इच्छा रखने वाला
कृतिका नक्षत्र का प्रभाव :-
विघभिलाषी ,पशु –प्रेम अस्वस्थ, भोगप्रिय, साधक , साधु-सनतों मे आस्था रखने वाला,कलहप्रिय, निर्धन से धनवान लड़ाई-झगड़ो मे रुचि रखने वाला,वकील और कट्टर धार्मिक
मेष राशि के फल
इस राशि के जातक पतले द्ढ शरीरवाले,स्थूल जांघोंवाले ,तीव्रगाती से चलने वाले ,कोमल स्वभाव ,भयंकर कर्म करने वाले, पानी से डरने वाले ,स्त्रियों के चित्त को प्रसन्नतादायक , पराक्रमी ,राज्यमान धन तथा धर्म कमाने मे परोपकारी ,सुशील ,मानी,चंचक ,कार्य –उतावला यात्राप्रिय ,दानी परदेशवासी तथा कठोर चित्त के होते है इस राशि वाले जातक को माँ का अल्प सुख तथा दो विवाह होने की संभावना रहती है |युध्द तथा स्वतंत्र व्यवसाय से उन्नति होती है | यह निरंतर किसी न किसी रोग से ग्रस्त होते होते हैं | ये जातक मेधावी ,तार्किक,असहिष्णु ,क्रोधी ,साधारण ज्ञानी , दृढ़निश्चयी,ईर्ष्यालू ,कुशाग्र बुद्धि ,युध्दप्रिय ,साहसी ,विव्दान, स्वतंत्र विचारक तथा उग्र स्वभाव के होते हैं | इनके शरीर का वर्ण ,पीताभ ,बड़े दांत तथा शरीर अधिक पसीना आने वाला होता है | ये सुझ –बुझवाले ,दूरदर्शी तथा प्रत्येक कार्य में दूसरों की अपेक्षा रखने वाले होते हैं | इनके आजीविका उपार्जन के कार्यो का संबंध प्राय: अग्नि धातु से होता है|
अशिवनी नक्षत्र में उत्पन्न जातक चंचल स्वभाव एंव दैवी गुण सम्पन्न ,भरणी नक्षत्र ,में उत्पन्न जातक मंद गति एवं कामी तथा कृतिक नक्षत्र के प्रथम चरण में उत्पन्न जातक क्रोधी व हिंसक स्वभाव के होते हैं
इस जातक के पहले ,सातवें ,आठवें तथा तेरहवें वर्ष मे ज्वर ,बारहवें वर्ष में जल से भय ,सत्रहवें वर्ष में विषूचिका रोग ,पच्चीसवें वर्ष में नेत्र –ज्योति में कमी या संतानोत्पति तथा बत्तीसवें वर्ष में रोग ,शत्रु अथवा शास्त्र द्वारा भय प्राप्र होने की संभावना रहती है |
इस राशि वाले जातक का रवि ,सोम मंगल तथा बुध “शुभ” ,गुरु ,शुक्र तथा शनि “अशुभ होता है | साथ ही मेष ,कर्क ,सिंह ,वृश्चिक, धनु तथा मीन राशि के स्त्री –पुरुषों के साथ उसका मैत्री , विवाह एंव व्यावसायिक संबंध बनाना शुभ एंव सुखदायक होता है