वृषभ राशि का स्वामी ग्रह,दिशा ( कार्य करने की ) राशि का तत्व, वृषभ राशि का स्वभाव, वृषभ राशि के नक्षत्र
ये उदार,सहृदय,क्षमाशील, धीर -गंभीर ,स्मृतिशाली,चिरग्राही,दूरदर्शी,परिणामदर्शी,सूक्ष्म निरीक्षण कर्ता,निर्लोभ,कर्मठ,परिश्रमी,बुरे कार्यों से लज्जा का अनुभव करने वाले,सत्संग गति प्रिय,अधिकार प्रिय,लेखक,मनोवैज्ञानिक तथा छोड़े जाने पर अत्यधिक असहिष्णु हो जाने वाले होतें हैं | इन्हें स्त्री, पुत्र, धन,गृह ,वाहन आदि का पूर्ण सुख प्राप्त होता है | इनके जीवन में आकस्मिक धन - प्राप्ति के योग भी आते हैं | ये बाल्यावस्था में दुखी तथा मध्य एवं वृद्धावस्था में सुखी रहतें हैं , इनकी स्मरणशक्ति तीव्र होती है |
वृषभ राशि से संबन्धित तथ्य
वृषभ राशि का स्वामी ग्रह
वृषभ राशि का स्वामीग्रह “शुक्र”ग्रह होता है
दिशा (कार्य करने की)
दक्षिण दिशा है
प्रत्येक राशि किसी ना किसी तत्व से सबंधित होती है
वृषभ राशि : पृथ्वी तत्व की राशि है
स्वभाव :-
वृषभ राशि का स्वभाव स्थिर है वह अपने से जातक को प्रभावित करती है |
नक्षत्र :-
नक्षत्रो का जातक पर प्रभाव :-
1॰कृतिका :- स्वामी गृह सूर्य, प्रभाव :- तेजस्वी, क्रोधी भ्रमणशील स्वाभिमानी
2 रोहिणी :- स्वामी गृह चन्द्र दुर्बल ,धार्मिक ,परछिद्रान्वेषी
3 मृगशिरा :- स्वामी गृह मंगल सौम्य -चित्त, चतुर,भोगी,शास्त्रज्ञ
अतः वृषभ राशि मे जन्मे जातक पर तीन ग्रहो और तीनों नक्षत्रो का जातक की कुण्डली के अनुसार ,महादशा ,अंर्तदशा , प्रव्यंतरदश, योगिनीदशा का प्रभाव पड़ता है |
कृतिका नक्षत्र का प्रभाव :-
विद्याभिलाषी ,पशु –प्रेम अस्वस्थ, भोगप्रिय, साधक , साधु-सनतों मे आस्था रखने वाला,कलहप्रिय, निर्धन से धनवान लड़ाई-झगड़ो मे रुचि रखने वाला,वकील और कट्टर धार्मिक
रोहणी नक्षत्र का प्रभाव :-
स्वच्छताप्रिय,असत्य बोलने वाला,संगीतप्रेमी,सामाजिक कार्यकर्ता,प्रसन्नचित्त,भूत-प्रेतों मे विश्वास रखने वाला,प्रतिष्ठा का इच्छुक,ईमानदार एवं सत्यभाषियों का हित सम्पादन करने वाला |
मृगशिरा नक्षत्र का प्रभाव :-
धनवान ,अनैतिक कार्यों के द्वारा धन इक्कठा करने वाला, अविश्वासी, उन्नतिगामी,सट्टा जुआँप्रेमी ,व्यापारी ,अधिकारी ,कार्यों में नीपूर्ण ,विचारशील,प्रतीभाशाली ,धार्मिक उत्सवों में झूठा आडंबर तथा शान-शौकत दिखाने वाला |
वृषभ राशि के फल
इस राशि में जन्म लेने वाले जातक दृढ़ शरीर,छोटे तथा मध्यम आकार, चौड़ा मस्तक,मोटे होंठ ,बड़ी आखें,बड़े दांत तथा गौर वर्ण वाले होते हैं | इनके सिर के बार अधेड़ अवस्था मे उड़ जाते हैं |ये जातक कष्टसहिष्णु ,वीर,महाबली,महापराक्रमी ,योगी ,प्रसन्नचित्त,परोपकारी ,पवित्र ,संतोषी ,शांत,शत्रुजयी,विलासी,बुद्धिमान,आलसी,दृढ़प्रतिज्ञ,लगनशील, चपल,सत्यवादी,अत्यंत घमंडी,दानी ,माता-पिता एवं गुरु का भक्त, श्रेठ,मित्रों वाला,स्वजनों से दूर रहने वालें,अलंकार प्रिय ,अपना कार्य करने मे दृढ़, प्राचीन परम्पराओं का पालन करने वाला,पर-स्त्रीगामी,स्त्रियों के आज्ञाकारी, राज्य द्वारा सम्मानित, संगीत एवं ललित कलाओं के प्रेमी तथा न्यालय द्वारा दोषी ठहराए जाने वाले होते हैं |
ये उदार,सहृदय,क्षमाशील, धीर -गंभीर ,स्मृतिशाली,चिरग्राही,दूरदर्शी,परिणामदर्शी,सूक्ष्म निरीक्षण कर्ता,निर्लोभ,कर्मठ,परिश्रमी,बुरे कार्यों से लज्जा का अनुभव करने वाले,सत्संग गति प्रिय,अधिकार प्रिय,लेखक,मनोवैज्ञानिक तथा छोड़े जाने पर अत्यधिक असहिष्णु हो जाने वाले होतें हैं | इन्हें स्त्री, पुत्र, धन,गृह ,वाहन आदि का पूर्ण सुख प्राप्त होता है | इनके जीवन में आकस्मिक धन - प्राप्ति के योग भी आते हैं | ये बाल्यावस्था में दुखी तथा मध्य एवं वृद्धावस्था में सुखी रहतें हैं , इनकी स्मरणशक्ति तीव्र होती है |