तुलाराशि का स्वामी ग्रह,दिशा ( कार्य करने की ) राशि का तत्व, कन्याराशि का स्वभाव, कन्याराशि के नक्षत्र
इस राशि वाले आस्तिक, मृदुभाषी, स्त्रीद्रोही तथा कुटुम्ब से दूर रहने वाले, व्यवसाय अथवा यातायात सम्बन्धी कार्यों से जीविकोपार्जन करने वाले सूक्ष्म, निरीक्षक तथा श्रेष्ठ निर्णायक होते हैं। ये व्यवहारकुशल, न्यायप्रिय, अनुशासनप्रिय, विनम्र, सुधारक, चंचल, पराक्रमी, क्रोधी, वाक्पटु, बलवान, बुद्धिमान, धर्मात्मा, धनी, व्यवसायपटु, मित्र से प्रेम रखने वाले, साझेदारी के काम में सफलता प्राप्त करने वाले, दुखी, अल्पसंततिवान्, वात प्रकृति के तथा दो विवाह के योग वाले होते हैं। ये काव्य संगीत तथा ललित कलाओं के प्रेमी, देव, पितृ-पूजक, युद्धप्रिय, प्रबंध, कुशल, परोपकारी, अन्नदानी, मिष्ठानभोजी तथा दूसरों पर भरोसा न करने वाले होते हैं। ये प्रत्येक कार्य को अपने बलबूते पर करने वाले होते हैं। इन्हें सिर, उदर, अथवा चर्मरोग होने की संभावना रहती है तथा पानी से भयभीत रहते हैं। चं. 6 8 चित्रा नक्षत्र का जातक क्रोधी, हिंसक एवं बलात्कारी, विशाखा नक्षत्र का विचारशील तथा स्वाति नक्षत्र का विवादी, आलसी, खान-पान के शौकीन तथा सज्जन होते हैं।
तुला राशि से संबन्धित तथ्य
तुलाराशि का स्वामी ग्रह
कन्याराशि का स्वामीग्रह "शुक्र"ग्रह होता है
दिशा (कार्य करने की)
पश्चिम दिशा है
प्रत्येक राशि किसी ना किसी तत्व से सबंधित होती है
तुलाराशि : वायु तत्व की राशि है
स्वभाव :-
कन्याराशि का स्वभाव चर है वह अपने से जातक को प्रभावित करती है |
नक्षत्र :-
नक्षत्रो का जातक पर प्रभाव :-
1॰चित्रा :- स्वामी मंगल स्वाभिमानी, विधि-विधान का ज्ञाता,मन में बात गुप्त रखनें वाला
2॰स्वाती :- स्वामी राहू धार्मिक ,भोगी दयालु ,विधावान
3॰विशाखा:- स्वामी गुरु घमंडी ,ईर्ष्यालु ,वाक चतुर
अतः तुलाराशि मे जन्मे जातक पर तीन ग्रहो और तीनों नक्षत्रो का जातक की कुण्डली के अनुसार ,महादशा ,अंर्तदशा , प्रव्यंतरदश, योगिनीदशा का प्रभाव पड़ता है|
चित्रा नक्षत्र का प्रभाव :-
कर्ण-नेत्र रोगी, अद्भुत कार्य करने वाला, साधारण बात पर भी गुस्सा करने वाला, नायक गुण से परिपूर्ण, शारीरिक बल बढ़ाने में प्रयत्नशील, निर्धन, विद्याभ्यास का इच्छुक, अनुभवी, शत्रुओं से मुकाबला बरने वाला तथा ईमानदार ।
स्वाती नक्षत्र का प्रभाव :-
, 15. स्वाति - वीर, नेता, ख्वाब देखनेवाला, भाग्यशाली, क्रोधावेश में स्वयं तथा घर को हानि पहुंचाने वाला। स्वतंत्र विचार रखने वाला, चतुराई से काम निकालने वाला, पुष्ट शरीर, तीव्र विचार शक्ति और शरीर में चोट पाने वाला।
विशाखा नक्षत्र का प्रभाव :-
विदेश घूमने वाला, चित्रकार, सच्चाई का इच्छुक, लड़ाई करने में निपुण, विचारहीन, चतुर व्यापार में रुचि रखने वाला, दूसरों को नेक सलाह देने वाला, भाषण देने में निपुण, उन्नतिशील तथा ज्योतिष में विश्वास रखने वाला।
तुला राशि के फल
इस राशि के जातक गौरवपूर्ण, मध्यम कद, चौड़ा चेहरा, चौड़ी छाती, चपटी नाक वाले, सुन्दर नेत्रों वाले पतले, परंतु पुष्ट एवं उन्नत शरीर वाले, कोई- कोई अंगहीन, वात प्रकृति वाले होते हैं। इस राशि वाले आस्तिक, मृदुभाषी, स्त्रीद्रोही तथा कुटुम्ब से दूर रहने वाले, व्यवसाय अथवा यातायात सम्बन्धी कार्यों से जीविकोपार्जन करने वाले सूक्ष्म, निरीक्षक तथा श्रेष्ठ निर्णायक होते हैं। ये व्यवहारकुशल, न्यायप्रिय, अनुशासनप्रिय, विनम्र, सुधारक, चंचल, पराक्रमी, क्रोधी, वाक्पटु, बलवान, बुद्धिमान, धर्मात्मा, धनी, व्यवसायपटु, मित्र से प्रेम रखने वाले, साझेदारी के काम में सफलता प्राप्त करने वाले, दुखी, अल्पसंततिवान्, वात प्रकृति के तथा दो विवाह के योग वाले होते हैं। ये काव्य संगीत तथा ललित कलाओं के प्रेमी, देव, पितृ-पूजक, युद्धप्रिय, प्रबंध, कुशल, परोपकारी, अन्नदानी, मिष्ठानभोजी तथा दूसरों पर भरोसा न करने वाले होते हैं। ये प्रत्येक कार्य को अपने बलबूते पर करने वाले होते हैं। इन्हें सिर, उदर, अथवा चर्मरोग होने की संभावना रहती है तथा पानी से भयभीत रहते हैं।
तुला राशि वालों का शुभ दिन, शुक्र, शनि तथा बुधवार होते हैं। अन्य दिन सामान्य रहते हैं। इनके लिए मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु तथा मीन राशि वालों से मित्रता, विवाह एवं व्यावसायिक सम्बन्ध बनाना सुखकर होता है।
चित्रा नक्षत्र का जातक क्रोधी, हिंसक एवं बलात्कारी, विशाखा नक्षत्र का विचारशील तथा स्वाति नक्षत्र का विवादी, आलसी, खान-पान के शौकीन तथा सज्जन होते हैं।