सिंह राशि का स्वामी ग्रह,दिशा ( कार्य करने की ) राशि का तत्व, सिंहराशि का स्वभाव, सिंहराशि के नक्षत्र
इस राशि के जातकों का पुष्ट शरीर, ताम्र अथवा पाण्डुवर्ण, विशाल नेत्रों वाला बड़ी ठोड़ी, सुन्दर मुख, चौड़े कंधे, पतली कमर एवं आकर्षक व्यक्तित्व होता है। इस राशि के जातक जिद्दी, सहृदय, सात्त्विक, रूढ़िवादी, चंचल, क्रोधी, विद्वान, उदार, साधुसेवी, वेदान्तप्रिय, कला-साहित्यप्रेमी, स्थिर स्वभाव, हिंसक, पराक्रमी, मानी, शीघ्र क्रोधित, मांसाहारी, निष्ठुर, अहंकारी तथा देश-विदेश, वन-पर्वत आदि में भ्रमण करने वाले होते हैं। ये शत्रुओं से मानसिक पीड़ित, पर्यटनप्रिय, कलाओं के जानकार, हंसमुख, सुप्रसिद्ध तथा मातृभक्त भी होते हैं। कभी-कभी कृपणता के लक्षण भी इनमें दिखाई देते हैं। माता- कुटुम्ब के प्रिय, धन-धान्यादि से परिपूर्ण, ऐश्वर्यशाली एवं अल्प संतान वाले होते हैं। ये स्त्रियों से मतभेद रखते हैं। इनका जीविकोपार्जन अग्नि तत्व से सम्बन्धित वस्तुओं एवं कार्यों द्वारा चलता है। ये अपने स्थान पर प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाले, वकालत तथा चिकित्सा जैसे व्यवसाय से भी धन एवं प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाले होते हैं। इनके जीवन में दो बार चोरों द्वारा हानि पहुंचने की संभावना रहती है।
सिंह राशि से संबन्धित तथ्य
सिंह राशि का स्वामी ग्रह
सिंहराशि का स्वामीग्रह “सूर्य ”ग्रह होता है
दिशा (कार्य करने की)
पूर्व दिशा है
प्रत्येक राशि किसी ना किसी तत्व से सबंधित होती है
सिंह राशि : अग्नि तत्व की राशि है
स्वभाव :-
सिंहराशि का स्वभाव स्थिर है वह अपने से जातक को प्रभावित करती है |
नक्षत्र :-
नक्षत्रो का जातक पर प्रभाव :-
1 मघा :- स्वामी ग्रह केतू ,मानी ,पुण्यवान ,असहन -शील ,उघमी ,भोगी
2 पू0फाल्गुनी :- स्वामी गृह शुक्र चपल ,दानी ,सुंदर ,कामुक
3 उ0फाल्गुनी :- स्वामी ग्रह सूर्य स्वाभिमानी ,कृतज्ञ ,विव्दान ,दयालु
अतः सिंहराशि मे जन्मे जातक पर तीन ग्रहो और तीनों नक्षत्रो का जातक की कुण्डली के अनुसार ,महादशा ,अंर्तदशा , प्रव्यंतरदश, योगिनीदशा का प्रभाव पड़ता है|
मघा नक्षत्र का प्रभाव :-
मघा - गुप्त कार्यप्रेमी, क्रोधी, अकस्मात् हानि उठाने वाला, कर्णरोगी, तेज आवाज वाला, प्रबल कामी, दूसरों के धन पर कब्जा रखने वाला, उन्नति में बाधाओं का सामना करने वाला, अप्रसन्नचित्त, चर्मरोग से पीड़ित, चिन्ताग्रस्त एवं कम वेतन प्राप्त करने वाला।
पू0फाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव :-
शस्त्र चलाने मे निपुण ,पशु -प्रेम ,व्यापारिक कार्यो मे रुचि रखने वाला ,धार्मिक सस्थानों में कार्य -प्रेमी ,क्रय -विक्रय में हानि उठाने वाला ,उन्नति में असफल ,मान -सन्नमान की इच्छा रखने वाला ,इन्द्रिय रोग से ग्रस्त ,स्वधर्म में अश्रद्धा रखने वाला ,सिर पर चोट का निशान रखने वाला ,परेशान और हिम्मत वाला |
उत्तराफागुनी नक्षत्र का प्रभाव :-
प्रियभाषी, कार्यकुशल, अल्प द्रव्यवाला, थोड़े में जीने वाला, एकान्त प्रेमी, पशु-प्रेमी, मातृ-पितृ-सुख से वंचित, तीक्ष्ण स्मरण शक्ति का स्वामी, कला में निपुण और सम्बन्धियों से मधुर व्यवहार रखने वाला।
सिंहराशि के फल
इस राशि के जातकों का पुष्ट शरीर, ताम्र अथवा पाण्डुवर्ण, विशाल नेत्रों वाला बड़ी ठोड़ी, सुन्दर मुख, चौड़े कंधे, पतली कमर एवं आकर्षक व्यक्तित्व होता है। इस राशि के जातक जिद्दी, असहिष्णु, पवित्र, मेधावी, परोपकारी,सहृदय, सात्त्विक, रूढ़िवादी, चंचल, क्रोधी, विद्वान, उदार, साधुसेवी, वेदान्तप्रिय, कला-साहित्यप्रेमी, स्थिर स्वभाव, हिंसक, पराक्रमी, मानी, शीघ्र क्रोधित, मांसाहारी, निष्ठुर, अहंकारी तथा देश-विदेश, वन-पर्वत आदि में भ्रमण करने वाले होते हैं। ये शत्रुओं से मानसिक पीड़ित, पर्यटनप्रिय, कलाओं के जानकार, हंसमुख, सुप्रसिद्ध तथा मातृभक्त भी होते हैं। कभी-कभी कृपणता के लक्षण भी इनमें दिखाई देते हैं। माता- कुटुम्ब के प्रिय, धन-धान्यादि से परिपूर्ण, ऐश्वर्यशाली एवं अल्प संतान वाले होते हैं। ये स्त्रियों से मतभेद रखते हैं। इनका जीविकोपार्जन अग्नि तत्व से सम्बन्धित वस्तुओं एवं कार्यों द्वारा चलता है। ये अपने स्थान पर प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाले, वकालत तथा चिकित्सा जैसे व्यवसाय से भी धन एवं प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाले होते हैं। इनके जीवन में दो बार चोरों द्वारा हानि पहुंचने की संभावना रहती है।
इस राशि वाले जातकों के जीवन में प्रथम वर्ष प्रेत-बाधा, पांचवें वर्ष सर्पभय, इक्कीसवें में पीड़ा, अट्ठाइसवें में अपवाद तथा बत्तीसवें वर्ष में रोगादि का कष्ट होने की संभावना रहती है। इनका शुभ दिन सोम, मंगल, गुरु तथा रवि एवं अन्य दिन सामान्य होते हैं।
इनके लिए मेष,कर्क,सिंह,वृश्चिक,धनु तथा मीन राशि वालों के साथ मैत्री विवाह एवं व्यावसायिक संबंध बनाना सुखद्प्रद होता हैं