मकर राशि का स्वामी ग्रह,दिशा ( कार्य करने की ) राशि का तत्व, मकर राशि का स्वभाव, मकर राशि के नक्षत्र
इस राशि के अक्षर भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी होता है।
मकर राशि से संबन्धित तथ्य
मकर राशि का स्वामी ग्रह
मकर राशि का स्वामीग्रह “शनि”ग्रह होता है
दिशा (कार्य करने की)
दक्षिण दिशा है
प्रत्येक राशि किसी ना किसी तत्व से सबंधित होती है
मकर राशि : वायु तत्व की राशि है
स्वभाव :-
मकर राशि का स्वभाव चर राशि है वह अपने से जातक को प्रभावित करती है |
नक्षत्र :-
नक्षत्रो का जातक पर प्रभाव :-
1 उत्तराषाढ़ा नक्षत्र :- स्वामी सूर्य है,शोधकर्ता, चिकित्सा, शिकारी, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता, सरकारी कर्मचारी सबसे उपयुक्त व्यवसाय होते हैं।
2 श्रवण नक्षत्र :-स्वामी शुक्र है, कृतज्ञ, सुंदर, दाता, सर्वगुण संपन्न, लक्ष्मीवान, पंडित, धनवान और विख्यात होता है।
3 धनिष्ठा नक्षत्र:- स्वामी मंगल है,ऊर्जावान, तेजस्वी, पराक्रमी, परिश्रम के द्वारा सफलता पाने वाला होता है।
अतः मकर राशि मे जन्मे जातक पर तीन ग्रहो और तीनों नक्षत्रो का जातक की कुण्डली के अनुसार ,महादशा ,अंर्तदशा , प्रव्यंतरदश, योगिनीदशा का प्रभाव पड़ता है|
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का प्रभाव :-
इस नक्षत्र से प्रभावित व्यक्ति साहसी और धैर्यवान होते हैं। न्याय और नियम-कानून का संजीदगी से पालन करते हैं। ऐसे व्यक्ति प्राचीन मान्यताओं पर विश्वास रखते हैं और परिवार की मर्यादा का पालन करते हैं। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के जातकों में उचित और अनुचित में भेद कर सकने की प्रबल क्षमता होती है।
श्रवण नक्षत्र का प्रभाव :-
ये लोग आकर्षक और मनमोहक होंगे। ये कूटनीतिक होंगे और कई लोगों को नौकरी पर रखेंगे। इनमें यौन संबंध बनाने की तीव्र इच्छा होगी। श्रवण नक्षत्र में जन्म होने से जातक कृतज्ञ, सुंदर, दाता, सर्वगुण संपन्न, लक्ष्मीवान, पंडित, धनवान और विख्यात होता है। श्रवण नक्षत्र के जातक सामाजिक व्यवहार में कुशल होते हैं तथा ऐसे जातक बहुत से मित्र बनाते हैं और बहुत सी समूह गतिविधियों में हिस्सा भी लेते हैं।
धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव :-
: धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग बुद्धिमान, परोपकारी, साहसी और ऊर्जावान होते हैं. इनमें खुद को परिस्थिति के मुताबिक ढालने की भी क्षमता होती है. इनकी खास बात है कि ये अपनी ओर से किसी को कोई तकलीफ नहीं देते हैं. एक बार ये जो ठान लेते हैं, उसे पूरा करके ही दम लेते हैं
'मकर' राशि के फल
इस राशि वाले जातक मकर राशि के जातक मोटे शरीर, पतली कमर, सुन्दर चेहरे, मनोहर आंखें, घनी भौंहें, लम्बे कद तथा बड़े दांतों वाले होते हैं। इनके बाल अत्यंत काले तथा कंठ आदि पर तिल का चिह्न होता है।
दृढ़निश्चयी, सहनशील, क्षमाशील, उदार, शान्त, धीर, गंभीर, ऐश्वर्यशाली, तमोगुणी, क्रोधी, कामुक, हिंसक, अपव्ययी, निर्लज्ज, स्त्रियासक्त, धर्म-विमुख, सहृदय, विज्ञानप्रेमी, काव्यकला प्रेमी, बड़े कुटुम्ब वाले, मातृभक्त, नौकर-चाकर एवं बन्धु-बान्धव से युक्त, कुल में श्रेष्ठ, सुख के लिए प्रयत्नशील, स्त्रियों के वश में रहने वाले, विद्वान, दयालु, सत्यवादी, दानी, दृढ़प्रतिज्ञ, लोभी, दंभी, क्रोधी, आलसी, संगीतज्ञ, काव्यकुशल, प्रभावशाली, यशस्वी तथा तीव्र स्मरण शक्ति वाले होते हैं।
इनमें कुछ सुप्रसिद्ध तो कुछ कुख्यात होते हैं। इनकी इनकी पत्नी सुन्दर हीनवर्ण तथा आयु में बड़ी भी हो सकती है। ये अपनी संतानों को दिलोजान से चाहते वाले तथा पुत्रवान् होते हैं। ये अपने व्यवहार से शत्रु पैदा कर लेने वाले,
पृथ्वी तथा धातु पदार्थों से अपनी आजीविका चलाने वाले एवं कुछ उच्चपद प्राप्त करने वाले होते हैं।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक सौम्य, साहसी तथा सहृदय, श्रवण नक्षत्र में जन्मे जातक योगी और चंचल स्वभाव के एवं धनिष्ठा नक्षत्र वाले क्रोधी, हिंसक तथा ठग होते हैं।
इनके जीवन में पाँचवें वर्ष में पीड़ा, सातवें में जलभय, दसवें वर्ष में ऊंचाई से गिरने का भय, बारहवें में शस्त्रभय, बीसवें में ज्वर के अलावा अन्य रोग भय, पच्चीसवें में हाथ-पांव में पीड़ा तथा पैंतीसवें वर्ष में अग्निभय की संभावना रहती है। इनका शुभ दिन बुधवार, शुक्रवार तथा शनिवार एवं अन्य दिन सामान्य होता है।
इस राशि वाले जातकों का वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर तथा कुम्भ राशि वालों के साथ विवाह, मित्रता एवं व्यावसायिक सम्बन्ध स्थापित करना सुखकर होता है।
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मकर राशि से संबन्धित तथ्य
मकर राशि का स्वामी ग्रह
मकर राशि का स्वामीग्रह “शनि”ग्रह होता है
दिशा (कार्य करने की)
दक्षिण दिशा है
प्रत्येक राशि किसी ना किसी तत्व से सबंधित होती है
मकर राशि : वायु तत्व की राशि है
स्वभाव :-
मकर राशि का स्वभाव चर राशि है वह अपने से जातक को प्रभावित करती है |
नक्षत्र :-
नक्षत्रो का जातक पर प्रभाव :-
1 उत्तराषाढ़ा नक्षत्र :- स्वामी सूर्य है,शोधकर्ता, चिकित्सा, शिकारी, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता, सरकारी कर्मचारी सबसे उपयुक्त व्यवसाय होते हैं।
2 श्रवण नक्षत्र :-स्वामी शुक्र है, कृतज्ञ, सुंदर, दाता, सर्वगुण संपन्न, लक्ष्मीवान, पंडित, धनवान और विख्यात होता है।
3 धनिष्ठा नक्षत्र:- स्वामी मंगल है,ऊर्जावान, तेजस्वी, पराक्रमी, परिश्रम के द्वारा सफलता पाने वाला होता है।
अतः मकर राशि मे जन्मे जातक पर तीन ग्रहो और तीनों नक्षत्रो का जातक की कुण्डली के अनुसार ,महादशा ,अंर्तदशा , प्रव्यंतरदश, योगिनीदशा का प्रभाव पड़ता है|
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का प्रभाव :-
इस नक्षत्र से प्रभावित व्यक्ति साहसी और धैर्यवान होते हैं। न्याय और नियम-कानून का संजीदगी से पालन करते हैं। ऐसे व्यक्ति प्राचीन मान्यताओं पर विश्वास रखते हैं और परिवार की मर्यादा का पालन करते हैं। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के जातकों में उचित और अनुचित में भेद कर सकने की प्रबल क्षमता होती है।
श्रवण नक्षत्र का प्रभाव :-
ये लोग आकर्षक और मनमोहक होंगे। ये कूटनीतिक होंगे और कई लोगों को नौकरी पर रखेंगे। इनमें यौन संबंध बनाने की तीव्र इच्छा होगी। श्रवण नक्षत्र में जन्म होने से जातक कृतज्ञ, सुंदर, दाता, सर्वगुण संपन्न, लक्ष्मीवान, पंडित, धनवान और विख्यात होता है। श्रवण नक्षत्र के जातक सामाजिक व्यवहार में कुशल होते हैं तथा ऐसे जातक बहुत से मित्र बनाते हैं और बहुत सी समूह गतिविधियों में हिस्सा भी लेते हैं।
धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव :-
: धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग बुद्धिमान, परोपकारी, साहसी और ऊर्जावान होते हैं. इनमें खुद को परिस्थिति के मुताबिक ढालने की भी क्षमता होती है. इनकी खास बात है कि ये अपनी ओर से किसी को कोई तकलीफ नहीं देते हैं. एक बार ये जो ठान लेते हैं, उसे पूरा करके ही दम लेते हैं
'मकर' राशि के फल
इस राशि वाले जातक मकर राशि के जातक मोटे शरीर, पतली कमर, सुन्दर चेहरे, मनोहर आंखें, घनी भौंहें, लम्बे कद तथा बड़े दांतों वाले होते हैं। इनके बाल अत्यंत काले तथा कंठ आदि पर तिल का चिह्न होता है। दृढ़निश्चयी, सहनशील, क्षमाशील, उदार, शान्त, धीर, गंभीर, ऐश्वर्यशाली, तमोगुणी, क्रोधी, कामुक, हिंसक, अपव्ययी, निर्लज्ज, स्त्रियासक्त, धर्म-विमुख, सहृदय, विज्ञानप्रेमी, काव्यकला प्रेमी, बड़े कुटुम्ब वाले, मातृभक्त, नौकर-चाकर एवं बन्धु-बान्धव से युक्त, कुल में श्रेष्ठ, सुख के लिए प्रयत्नशील, स्त्रियों के वश में रहने वाले, विद्वान, दयालु, सत्यवादी, दानी, दृढ़प्रतिज्ञ, लोभी, दंभी, क्रोधी, आलसी, संगीतज्ञ, काव्यकुशल, प्रभावशाली, यशस्वी तथा तीव्र स्मरण शक्ति वाले होते हैं।
इनमें कुछ सुप्रसिद्ध तो कुछ कुख्यात होते हैं। इनकी इनकी पत्नी सुन्दर हीनवर्ण तथा आयु में बड़ी भी हो सकती है। ये अपनी संतानों को दिलोजान से चाहते वाले तथा पुत्रवान् होते हैं। ये अपने व्यवहार से शत्रु पैदा कर लेने वाले, पृथ्वी तथा धातु पदार्थों से अपनी आजीविका चलाने वाले एवं कुछ उच्चपद प्राप्त करने वाले होते हैं।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक सौम्य, साहसी तथा सहृदय, श्रवण नक्षत्र में जन्मे जातक योगी और चंचल स्वभाव के एवं धनिष्ठा नक्षत्र वाले क्रोधी, हिंसक तथा ठग होते हैं।
इनके जीवन में पाँचवें वर्ष में पीड़ा, सातवें में जलभय, दसवें वर्ष में ऊंचाई से गिरने का भय, बारहवें में शस्त्रभय, बीसवें में ज्वर के अलावा अन्य रोग भय, पच्चीसवें में हाथ-पांव में पीड़ा तथा पैंतीसवें वर्ष में अग्निभय की संभावना रहती है। इनका शुभ दिन बुधवार, शुक्रवार तथा शनिवार एवं अन्य दिन सामान्य होता है।
इस राशि वाले जातकों का वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर तथा कुम्भ राशि वालों के साथ विवाह, मित्रता एवं व्यावसायिक सम्बन्ध स्थापित करना सुखकर होता है।