कुम्भ राशि का स्वामी ग्रह,दिशा ( कार्य करने की ) राशि का तत्व, कुम्भ (Aquarius) का स्वभाव, कुम्भ (Aquarius) के नक्षत्र
इस राशि के जातक दुस्साहसी, चंचल, व्यवहारकुशल, कुशाग्रबुद्धि, तपस्याप्रिय, भातृद्रोही, ईर्ष्यालु, द्वेषी, अहंकारी, ज्ञानी, विद्वान, सुवक्ता, सुलेखक, दार्शनिक, स्वकार्य में चतुर, शिक्षित, गृहासक्त तथा अकुशल प्रबंधक होते हैं। कुछ जातक कृतज्ञ, दानी, दयालु, धर्म-कर्म, में शीघ्रता करने वाले, विद्या-क्षेत्र में उद्यमी, मित्रप्रिय, मानी, निर्भय, शिल्पी, माताप्रिय, प्रेमीविहीन, कामी, शत्रुजयी, उन्मत्त, मद्यपी, परस्त्री में आसक्त, दुखी, पराये धन का अपहरण करने वाले कुमार्गी, अल्सन्ततिन् परपुत्रस्नेही एवं कला तथा राजनीति के क्षेत्र में रूचि रखने वाले होते हैं। इनके दो विवाह होने की सभावना के साथ-साथ जीवन में कई हानि-लाभ के अवसर आते हैं। ये वायु तत्व वाले तथा नौकरी के माध्यम से अपनी आजीविका चलाने वाले होते हैं।
कुम्भ राशि से संबन्धित तथ्य
कुम्भ (Aquarius) का स्वामी ग्रह
कुम्भ (Aquarius) का स्वामीग्रह “शनि”ग्रह होता है
दिशा (कार्य करने की)
पश्चिम दिशा है
प्रत्येक राशि किसी ना किसी तत्व से सबंधित होती है
कुम्भ (Aquarius) : वायु तत्व की राशि है
स्वभाव :-
कुम्भ (Aquarius) का स्वभाव स्थिर राशि है वह अपने से जातक को प्रभावित करती है |
नक्षत्र :-
नक्षत्रो का जातक पर प्रभाव :-
1धनिष्ठा नक्षत्र ,:- स्वामी मंगल, बुद्धिमान, परोपकारी, साहसी और ऊर्जावान
2 शतभिषा नक्षत्र,:- स्वामी राहु, सत्य,धर्म के प्रति निष्ठावान,दर्शन, चिकित्सा, मनोविज्ञान एवं ज्योतिष विषयों
3 पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र :- स्वामी गुरु धनी, सुंदर,पुण्यवान ,दानी
अतः कुम्भ (Aquarius) मे जन्मे जातक पर तीन ग्रहो और तीनों नक्षत्रो का जातक की कुण्डली के अनुसार ,महादशा ,अंर्तदशा , प्रव्यंतरदश, योगिनीदशा का प्रभाव पड़ता है|
धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव :-
धनवान ,अनैतिक कार्यों के द्वारा धन इक्कठा करने वाला, अविश्वासी, उन्नतिगामी,सट्टा जुआँप्रेमी ,व्यापारी ,अधिकारी ,कार्यों में नीपूर्ण ,विचारशील,प्रतीभाशाली ,धार्मिक उत्सवों में झूठा आडंबर तथा शान-शौकत दिखाने वाला |
शतभिषानक्षत्र का प्रभाव :-
सत्य और धर्म के प्रति निष्ठावान होते हैं। दर्शन, चिकित्सा, मनोविज्ञान एवं ज्योतिष विषयों में इनकी रूचि होती है।
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव :-
, पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का शासक ग्रह बृहस्पति है। हर तरह से, यह दो व्यक्तित्व को दर्शाता है, जिसमें एक अत्यधिक नम्र, सभ्य तथा संस्कारी होता है और दूसरा अत्यधिक हिंसक तथा विनाशकारी होता है।
कुम्भ (Aquarius) के फल
इस राशि वाले जातकों का कद, लम्बा, नाक चपटी, चेहरा चौड़ा, गर्दन मोटी, होंठ मोटे, गाल चौड़े, शरीर दुर्बल तथा बाल रूखे होते हैं। इनका व्यक्तित्व आकर्षक होने के साथ-साथ इनके पांव तथा मुंह पर तिल आदि के निशान होते हैं। इस राशि के जातक दुस्साहसी, चंचल, व्यवहारकुशल, कुशाग्रबुद्धि, तपस्याप्रिय, भातृद्रोही, ईर्ष्यालु, द्वेषी, अहंकारी, ज्ञानी, विद्वान, सुवक्ता, सुलेखक, दार्शनिक, स्वकार्य में चतुर, शिक्षित, गृहासक्त तथा अकुशल प्रबंधक होते हैं। कुछ जातक कृतज्ञ, दानी, दयालु, धर्म-कर्म, में शीघ्रता करने वाले, विद्या-क्षेत्र में उद्यमी, मित्रप्रिय, मानी, निर्भय, शिल्पी, माताप्रिय, प्रेमीविहीन, कामी, शत्रुजयी, उन्मत्त, मद्यपी, परस्त्री में आसक्त, दुखी, पराये धन का अपहरण करने वाले कुमार्गी, अल्सन्ततिन् परपुत्रस्नेही एवं कला तथा राजनीति के क्षेत्र में रूचि रखने वाले होते हैं। इनके दो विवाह होने की सभावना के साथ-साथ जीवन में कई हानि-लाभ के अवसर आते हैं। ये वायु तत्व वाले तथा नौकरी के माध्यम से अपनी आजीविका चलाने वाले होते हैं। धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक साहसी, सौम्य तथा सहृदय शतभिषा नक्षत्रवाले जातक चंचल स्वभाव के, भोगी तथा पूर्वाभाद्रपदवाले क्रोधी, हिंसक तथा ठक प्रवृत्ति के होते हैं। इस राशि के जातकों के जीवन के पहले वर्ष में पीड़ा, पांचवें में अग्निभय, बारहवें में सर्प तथा जलभय एवं अट्ठारहवें वर्ष में चोरी द्वारा धन-हानि की संभावना के साथ तीसवें वर्ष में इनकी भाग्योन्नति होती है। इनके शुभ दिन बुधवार तथा शनिवार एवं अन्य सामान्य होते हैं। इनका वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर तथा कुम्भ राशिवालों के साथ विवाह, मित्रता तथा व्यावसायिक सम्बन्ध सुखकर एवं लाभदायक होता है।